आलोक
दैनिक समसामयिक पत्रिका | 13 जून, 2026
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा 'रियूजेबल लॉन्च व्हीकल' (RLV-LEX-3) का अंतिम स्वायत्त लैंडिंग परीक्षण सफल: खबर: इसरो ने चित्रदुर्ग के एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज (ATR) से अपने पुनर्चक्रण योग्य प्रक्षेपण यान (RLV) 'पुष्पक' का तीसरा और सबसे जटिल स्वायत्त लैंडिंग मिशन (RLV-LEX-3) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इसमें यान ने प्रतिकूल हवाओं के बीच अपनी दिशा को खुद संशोधित कर लैंडिंग पैड को छुआ।
महत्व: यह सफलता भारत को अंतरिक्ष में पेलोड भेजने की लागत को $80\%$ तक कम करने की दिशा में वैश्विक रूप से अग्रणी बनाती है। पूर्णतः स्वदेशी नेविगेशन और मार्गदर्शन प्रणालियों पर आधारित यह परीक्षण अंतरिक्ष मलबे को कम करने और दीर्घकालिक अंतरिक्ष मिशनों के संचालन में क्रांतिकारी भूमिका निभाएगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय द्वारा 'क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर' (CII) की सुरक्षा हेतु नई राष्ट्रीय गाइडलाइन: खबर: मंत्रालय ने बैंकिंग, पावर ग्रिड, न्यूक्लियर और परिवहन प्रणालियों के कोर सर्वर्स को हाइब्रिड साइबर हमलों (Ransomware & State-sponsored attacks) से बचाने के लिए सख्त शून्य-विश्वास (Zero-Trust) सुरक्षा प्रोटोकॉल अनिवार्य कर दिए हैं।
महत्व: डिजिटल होती भारतीय अर्थव्यवस्था के बीच, राष्ट्रीय डेटा और ग्रिड सुरक्षा को अक्षुण्ण रखना संप्रभुता का मामला है। यह नीति महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर होने वाले ब्लैकआउट के खतरों को वास्तविक समय में रोकने की प्रशासनिक क्षमता को सुदृढ़ करेगी।
नीति आयोग द्वारा 'अकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम' (ABP) की पहली त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट जारी: खबर: देश के सबसे पिछड़े 500 ब्लॉकों के मूल्यांकन में स्वास्थ्य, पोषण, बुनियादी शिक्षा और जल प्रबंधन के संकेतकों पर पूर्वोत्तर और मध्य भारत के ब्लॉकों ने रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है।
महत्व: यह प्रगति 'सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद' को ब्लॉक स्तर तक विकेंद्रीकृत करती है, जिससे संसाधनों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित होता है और 'सबका साथ, सबका विकास' का प्रशासनिक विजन धरातल पर दिखाई देता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 'नेशनल रेयर डिजीज रजिस्ट्री' (NRDR) का शुभारंभ: खबर: दुर्लभ बीमारियों (जैसे मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर) के सटीक इलाज और स्वदेशी दवा अनुसंधान (Orphan Drugs Manufacturing) को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल डेटाबेस की शुरुआत की गई है।
महत्व: इस सांख्यिकीय कदम से महंगी आयातित दवाओं पर निर्भरता कम होगी और फार्मास्युटिकल कंपनियों को लक्षित शोध के लिए बजटीय प्रोत्साहन देने में प्रशासनिक पारदर्शिता आएगी।
भारत-प्रशांत आर्थिक ढांचा (IPEF) के 'स्वच्छ और निष्पक्ष अर्थव्यवस्था' स्तंभ पर भारत द्वारा पुष्टि: खबर: सिंगापुर में आयोजित मंत्रिस्तरीय बैठक के बाद भारत ने आधिकारिक रूप से आईपीईएफ (IPEF) के तीसरे और चौथे स्तंभ की संधियों की पुष्टि की है, जो भ्रष्टाचार विरोधी उपायों और कर पारदर्शिता को बढ़ावा देती हैं।
महत्व: यह रणनीतिक निर्णय हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के आर्थिक प्रभुत्व के समानांतर एक स्वच्छ, नियम-आधारित और टिकाऊ आपूर्ति श्रृंखला को आकार देने के लिए पश्चिमी और दक्षिण-पूर्व एशियाई लोकतंत्रों के साथ भारत के बढ़ते आर्थिक एकीकरण को दर्शाता है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत का अफ्रीकी प्रतिनिधित्व के लिए पुरजोर समर्थन: खबर: न्यूयॉर्क में बहुपक्षवाद पर आयोजित खुली बहस के दौरान भारतीय स्थायी प्रतिनिधि ने यूएनएससी के स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में अफ्रीका को स्थायी प्रतिनिधित्व देने की मांग दोहराई।
महत्व: यह भारत की 'ग्लोबल साउथ' (Global South) के वास्तविक नेता के रूप में कूटनीतिक साख को और मजबूत करता है, जो वैश्विक मंचों के लोकतंत्रीकरण और ऐतिहासिक अन्यायों को सुधारने की वकालत करता है।
भारत और ओमान के बीच 'विदेशी कामगार कल्याण' पर ऐतिहासिक समझौता: खबर: मस्कट में आयोजित द्विपक्षीय बैठक के दौरान दोनों देशों ने भारतीय प्रवासियों के अधिकारों की सुरक्षा, सुरक्षित प्रवासन और प्रेषित धन (Remittances) के डिजिटल हस्तांतरण को सरल बनाने के लिए एक संयुक्त पोर्टल को मंजूरी दी।
महत्व: पश्चिमी एशिया (खाड़ी क्षेत्र) में भारत की यह सक्रिय कूटनीति न केवल हमारे प्रवासियों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ओमान के दुकम बंदरगाह (Duqm Port) तक भारत की पहुंच के संदर्भ में संबंधों को प्रगाढ़ बनाती है।
आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) द्वारा 'पीएम-प्रणाम' (PM-PRANAM) योजना के बजट में बढ़ोतरी: खबर: केंद्र सरकार ने रासायनिक उर्वरकों (जैसे यूरिया) के उपयोग को कम करने और वैकल्पिक व जैविक उर्वरकों को बढ़ावा देने वाले राज्यों के लिए सब्सिडी प्रोत्साहन राशि में $15\%$ की अतिरिक्त वृद्धि की है।
महत्व: यह कदम मृदा स्वास्थ्य की रक्षा करने और राजकोषीय मोर्चे पर सरकार के उर्वरक सब्सिडी बिल के भारी बोझ को कम करने का एक बेहतरीन नीतिगत समन्वय प्रस्तुत करता है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 'मॉडल जेल अधिनियम 2026' के कार्यान्वयन की समीक्षा: खबर: जेलों को सुधार गृहों में बदलने, कैदियों के मानवाधिकारों की रक्षा और विचाराधीन कैदियों (Under-trials) की कानूनी सहायता के लिए राज्यों को एआई-आधारित 'जेल गवर्नेंस सिस्टम' अपनाने की प्रशासनिक सलाह दी गई है।
महत्व: यह सुधारात्मक नीति पारंपरिक औपनिवेशिक दंडात्मक व्यवस्था से हटकर आपराधिक न्याय प्रणाली में 'पुनर्वास' (Rehabilitation) और पारदर्शिता लाने के प्रशासनिक संकल्प को प्रदर्शित करती है।
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 'केन-बेतवा लिंक परियोजना' के विस्थापितों हेतु 'स्मार्ट रिहैबिलिटेशन विलेज' मॉडल की घोषणा: खबर: राज्य प्रशासन ने पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के बफर जोन से विस्थापित होने वाले परिवारों के लिए सौर ऊर्जा, आधुनिक शिक्षा और शत-प्रतिशत नल के जल से युक्त नए आदर्श गांवों के निर्माण की प्रशासनिक योजना जारी की है।
महत्व: मेगा-इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के कारण होने वाले सामाजिक विस्थापन के संकट को दूर करने के लिए यह मॉडल एक नजीर प्रस्तुत करता है, जहां विकास और समावेशी कल्याण (Inclusive Growth) साथ-साथ चलते हैं।
भारत-फ्रांस नौसेना के बीच द्विपक्षीय अभ्यास 'वरुण-2026' (Varuna) का शुभारंभ: खबर: हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से में दोनों देशों के विमानवाहक पोतों, पनडुब्बियों और समुद्री लड़ाकू विमानों ने संयुक्त पनडुब्बी-रोधी युद्ध कौशल (Anti-Submarine Warfare) का लाइव अभ्यास शुरू किया है।
महत्व: यह रक्षा कूटनीति हिंद महासागर में रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने और समुद्री डकैती तथा समुद्री मार्गों पर गैर-राज्य अभिनेताओं के बढ़ते खतरों के विरुद्ध एक मजबूत सामूहिक प्रतिरोधक स्थापित करती है।
पर्यावरणविदों द्वारा 'पश्चिमी घाट' में खोजी गई मेंढक की एक नई स्थानिक (Endemic) प्रजाति: खबर: वायनाड के सदाबहार वनों में भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के शोधकर्ताओं ने 'माइक्रोहाइलिड' (Microhylid) परिवार के एक अत्यंत सूक्ष्म मेंढक की खोज की है, जिसे 'आलोक राना' नाम दिया गया है।
महत्व: यह खोज रेखांकित करती है कि पश्चिमी घाट का नाजुक पारिस्थितिक तंत्र अभी भी जैविक रहस्यों से समृद्ध है। यह जैव विविधता हॉटस्पॉट के संरक्षण (GS Paper 3) और पर्यावरण-पर्यटन के अनियंत्रित प्रसार पर प्रशासनिक नियंत्रण की आवश्यकता को बल देता है।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा देश के 56वें बाघ अभयारण्य को सैद्धांतिक मंजूरी: खबर: पर्यावरण मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ और झारखंड की सीमा पर स्थित घने वन गलियारे को 'गुरु घासीदास-तमोर पिंगला' के विस्तार के रूप में नए बाघ आरक्षित क्षेत्र के रूप में अधिसूचित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
महत्व: यह कॉरिडोर मध्य भारत में बाघों के जीन पूल के सुरक्षित आवागमन (Gene Flow) के लिए अपरिहार्य है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्षों को कम करने और वनों के सघन घनत्व को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
4. देश: जिबूती (Djibouti)
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| भौगोलिक स्थिति | हॉर्न ऑफ अफ्रीका (Horn of Africa) - बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य के मुहाने पर |
| राजधानी | जिबूती सिटी |
| मुद्रा | जिबूती फ्रैंक (Djiboutian Franc) |
| मुख्य भौगोलिक इकाई | असाल झील (अफ्रीका का सबसे निचला बिंदु), डनाकिल मरुस्थल का हिस्सा |
| सामरिक महत्व | विश्व की महाशक्तियों (अमेरिका, चीन, फ्रांस, जापान) के सैन्य ठिकानों की मेजबानी करने वाला एकमात्र रणनीतिक बिंदु |
भू-राजनीतिक महत्व: जिबूती की भौगोलिक स्थिति इसे वैश्विक समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए एक 'चौकी' बनाती है। लाल सागर संकट और अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती को रोकने के लिए यह देश वैश्विक नौसेनाओं के लिए लॉजिस्टिक्स हब का काम करता है। भारत अपनी 'इंडो-पैसिफिक विजन' और अफ्रीका नीति के तहत जिबूती के साथ राजनयिक और समुद्री सुरक्षा संबंधों को लगातार विस्तार दे रहा है ताकि चीन के वहां बने पहले विदेशी सैन्य बेस का रणनीतिक मुकाबला किया जा सके।
5. राज्य विशेष: केरल (Kerala)
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| क्षेत्रफल | 38,863 वर्ग किमी (भारत के दक्षिण-पश्चिमी तट पर मालाबार तट) |
| राजधानी | तिरुवनंतपुरम |
| तटीय सीमा | लगभग 590 किमी लंबी अरब सागर से लगती सीमा |
| मुख्य भौगोलिक इकाई | पश्चिमी घाट (अनामुडी - दक्षिण भारत की सबसे ऊंची चोटी), वेम्बनाड झील (बैकवाटर्स/कयाल), पेरियार नदी |
| विशेषता | शत-प्रतिशत प्राथमिक शिक्षा, सर्वोच्च मानव विकास सूचकांक (HDI), और देश का पहला 'डिजिटल राज्य' |
सामरिक एवं आर्थिक महत्व: केरल का विझिंजम अंतरराष्ट्रीय डीपवाटर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट (Vizhinjam Port) वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों के अत्यंत निकट होने के कारण भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हो रहा है, जो कोलंबो और सिंगापुर पोर्ट्स की प्रतिस्पर्धा में भारतीय माल ढुलाई लागत को कम करेगा। इसके साथ ही, मानसून का भारत में पहला प्रवेश द्वार होने के कारण यह राज्य देश की कृषि अर्थव्यवस्था के पूर्वानुमानों के लिए भौगोलिक धुरी है।
6. भौगोलिक इकाई: मोम्बासा बंदरगाह (Port of Mombasa)
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| प्रकार | पूर्वी अफ्रीका का सबसे बड़ा और व्यस्ततम गहरे पानी का समुद्री बंदरगाह |
| अवस्थिति | केन्या (Kenya) - हिंद महासागर के तट पर |
| प्रवेश द्वार | भू-आबद्ध अफ्रीकी देशों (युगांडा, रवांडा, बुरुंडी, दक्षिण सूडान) के व्यापार का मुख्य मार्ग |
| महत्व | पूर्वी अफ्रीका के आर्थिक गलियारे 'उत्तरी कोरिडोर' (Northern Corridor) का मुख्य प्रस्थान बिंदु |
भू-राजनीतिक खींचतान: मोम्बासा बंदरगाह चीन के 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' (String of Pearls) और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत केन्या में बनाई गई मानक गेज रेलवे का मुख्य टर्मिनल है। भारत इस क्षेत्र में चीन के 'ऋण-जाल कूटनीति' (Debt-Trap Diplomacy) का मुकाबला करने के लिए केन्या और अन्य पूर्वी अफ्रीकी देशों को सागर (SAGAR) नीति के तहत विकास सहायता, रियायती ऋण (Lines of Credit) और समुद्री सुरक्षा गश्त की त्रयी प्रदान कर रहा है, जो पश्चिमी हिंद महासागर में भारत के रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए अनिवार्य है।
5. अंतर्राष्ट्रीय संबंध: हॉर्न ऑफ अफ्रीका में जिबूती का सैन्यीकरण और भारत का भू-रणनीतिक प्रत्युत्तर
विश्लेषण: जिबूती का एक छोटे से देश से वैश्विक सैन्य महाशक्तियों के गैरीसन (Garrison State) के रूप में बदलना समकालीन भू-राजनीति की सबसे अनूठी घटना है। बाब-अल-मंडेब और स्वेज नहर की सुरक्षा के नाम पर अमेरिका, फ्रांस, जापान और सबसे महत्वपूर्ण रूप से चीन ने यहाँ अपने सैन्य बेस स्थापित किए हैं। चीन का जिबूती बेस उसकी 'दूरस्थ महासागर परिचालन' क्षमता को बढ़ाता है, जो सीधे तौर पर हिंद महासागर में भारत के पारंपरिक प्रभुत्व को चुनौती देता है। भारत ने इसका मुकाबला करने के लिए 'लॉजिस्टिक्स विनिमय समझौतों' (जैसे अमेरिका के साथ LEMOA और फ्रांस के साथ संयुक्त समझौता) का नेटवर्क तैयार किया है, जिससे भारतीय नौसेना जरूरत पड़ने पर जिबूती और रीयूनियन द्वीपों के मित्र सैन्य ठिकानों का उपयोग कर सके। यह नीति भारत की 'सक्रिय समुद्री कूटनीति' का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
6. अर्थव्यवस्था एवं भूगोल: विझिंजम ट्रांसशिपमेंट पोर्ट और भारत की वैश्विक व्यापार संप्रभुता
विश्लेषण: भारत का लगभग $25\%$ अंतरराष्ट्रीय कार्गो कंटेनर वर्तमान में विदेशी ट्रांसशिपमेंट हब (विशेष रूप से कोलंबो, सिंगापुर और सिलाला) के माध्यम से रूट किया जाता है, जिससे भारतीय व्यापारियों को प्रति कंटेनर अतिरिक्त लागत और समय का नुकसान उठाना पड़ता है। केरल के तट पर 'विझिंजम पोर्ट' का पूर्ण विकास इस निर्भरता को समाप्त कर रहा है। अपनी 20 से 24 मीटर की प्राकृतिक गहराई (Natural Draft) के कारण यह बंदरगाह दुनिया के सबसे बड़े 'मेगा-मैक्स' कार्गो जहाजों को आसानी से बर्थिंग दे सकता है। प्रशासनिक दृष्टिकोण से, यह परियोजना न केवल भारत के विदेशी मुद्रा के बहिर्वाह को रोकेगी, बल्कि 'ब्लू इकोनॉमी नीति' के तहत तटीय राज्यों में सहायक विनिर्माण उद्योगों के क्लस्टर विकसित कर क्षेत्रीय रोजगार असंतुलन को भी दूर करेगी।
7. पर्यावरण एवं नीतिशास्त्र: 'पीएम-प्रणाम' योजना और भारत का कृषि-पारिस्थितिक (Agro-Ecological) संक्रमण
विश्लेषण: हरित क्रांति के बाद से रासायनिक उर्वरकों (विशेषकर यूरिया) के अत्यधिक और असंतुलित उपयोग ($N:P:K$ अनुपात का बिगड़ना) ने पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मृदा के मरुस्थलीकरण, भूजल के नाइट्रेट प्रदूषण और यूट्रोफिकेशन (Eutrophication) जैसी गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं को जन्म दिया है। इसके साथ ही, उर्वरक सब्सिडी का बजटीय घाटा राजकोषीय नीति को पंगु बनाता है। 'पीएम-प्रणाम' योजना राज्यों को उर्वरक सब्सिडी बचाने पर मिलने वाली $50\%$ राशि को वैकल्पिक कृषि अवसंरचना में लगाने का प्रोत्साहन देती है। यह नीतिगत बदलाव यह दर्शाता है कि पर्यावरण संरक्षण (मृदा स्वास्थ्य) और आर्थिक हित (राजकोषीय सुदृढ़ीकरण) एक दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। यह 'सतत विकास लक्ष्य-12' (टिकाऊ उपभोग और उत्पादन) को प्राप्त करने का एक व्यावहारिक प्रशासनिक साधन है।
प्रेरक उद्धरण (UPSC मुख्य परीक्षा परिप्रेक्ष्य)
"अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥" (यह मेरा है और वह पराया है, ऐसी गणना संकुचित बुद्धि वाले लोग करते हैं। उदार चरित्र वाले लोगों के लिए तो संपूर्ण पृथ्वी ही एक परिवार है।) - महाउपनिषद
व्याख्या: 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का यह सनातन विचार भारत की विदेश नीति (Foreign Policy) का मार्गदर्शक सिद्धांत है। जब भारत 'अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन' का नेतृत्व करता है, टीकों का वैश्विक वितरण (Vaccine Maitri) करता है, या संयुक्त राष्ट्र में जलवायु न्याय (Climate Justice) के लिए 'ग्लोबल साउथ' की आवाज़ बनता है, तो वह इसी सार्वभौमिक दर्शन को मूर्त रूप दे रहा होता है। इसे निबंध, नीतिशास्त्र (GS Paper 4) और GS Paper 2 में 'भारत की विदेश नीति के दार्शनिक आधार' जैसे प्रश्नों को समृद्ध और अकादमिक गहराई देने के लिए बखूबी उद्धृत किया जा सकता है।
आज का प्रश्न (Mains Perspective - GS Paper 2)
प्रश्न: "हॉर्न ऑफ अफ्रीका और पश्चिमी हिंद महासागर में विदेशी सैन्य ठिकानों का बढ़ता संकेंद्रण वैश्विक समुद्री सुरक्षा और भारत के रणनीतिक हितों के समक्ष एक बहुआयामी चुनौती प्रस्तुत करता है।" जिबूती और मोम्बासा के विशेष संदर्भ में इस कथन का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए तथा भारत द्वारा इस क्षेत्र में अपनाई जा रही 'प्रति-संतुलन' (Counter-balancing) रणनीतियों की विवेचना कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)
आज का अभ्यास प्रश्न (अभ्यास)
प्रश्न 1: 'हॉर्न ऑफ अफ्रीका' में स्थित वह कौन सा रणनीतिक देश है, जो बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य के मुहाने पर स्थित है और जहाँ चीन ने अपना पहला विदेशी सैन्य बेस स्थापित किया है?
उत्तर: जिबूती (Djibouti)।
प्रश्न 2: भारत के किस राज्य में निर्माणाधीन 'विझिंजम अंतरराष्ट्रीय गहरे पानी का ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह' वैश्विक व्यापार मार्गों पर कोलंबो और सिंगापुर पोर्ट्स पर भारत की निर्भरता को कम करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है?
उत्तर: केरल (यह भारत के मालाबार तट पर स्थित एक प्राकृतिक गहरे ड्राफ्ट वाला बंदरगाह है)।