प्रेम की पराकाष्ठा

अमन दुबे

प्रेम की पराकाष्ठा

17 जून 2026

किसी की सिसकियां थमीं
किसी ने आसूं पोछे

किसी ने
जी भर रो कर सुकून ढूंढा

तकलीफ में रहे वो लोग
जिन्होंने भीतर डैम बना कर
सब कुछ जकड़े रखा

भूल गए
प्रकृति की प्रवृति
मुरझाना नही सीखा

किसी की विरह में
अकेले बैठ रोने का सुख जिन्हे नही मिला
वो वंचित रहे हमेशा
प्रेम की पराकाष्ठा से ।

©अमन दुबे 17 जून 2026@(कव्य कुंज, आलोक पत्रिका)